Translate

रविवार, 14 सितंबर 2014

नवग्रह - वास्तु शास्त्र

जय माता दी..............
मैंने वास्तु का अध्यन शुरू किया तब कुछ बाते मुझे बड़ी अजीब लगती थी एक वास्तु दोष के कोई भी सरल और सटीक उपाय नहीं है उपाय है तो सिर्फ तोड़ फोड़ करके वास्तु सही कीजिये और दूसरी बात तो मुझे इससे भी ज्यादा अजीब लगती थी की वास्तु दोष के उपाय में फेंगसुई और पिरामिड का लगाया जाना या बताया जाना और मैं जब भी इन दो बातो पढता था मुझे ऐसा लगता था  की कंही कोई कमी है।
भारत देश का मुख्य धर्म सनातन धर्म और उस धर्म में मृत्यु को टालने तक के उपाय बताये गए है तो क्या वास्तु के उपायों के बारे में वंहा चर्चा नहीं हुयी होगी जरुर हुयी होगी तभी तो भारत के ऋषि मुनि इतने समृद्ध और ज्ञान वान थे उनके पास ज्ञान का असीम खजाना था और उनको कोई भी वास्तु दोष परेशान नहीं करते थे।
भारत देश के ऋषि मुनि प्रक्रति से अपने वास्तुदोषो को नियंत्रित करते थे जैसे पेड़ पौधे, पशु, अग्नि, यन्त्र आदी तभी वो खुद को ज्ञानवान और स्वस्थ बनाये रखने में सक्षम हुए।
मैंने भी इसी दिशा में काफी काम किया है और माता की इच्छा से सफल भी हुआ हूँ कितने ही घरो में मैंने बिना तोड़ फोड़ वास्तु दोष के सरल और सटीक उपायों को लागु करके लोगो की तकलीफों को कम करा है जो एकदम प्राक्रतिक उपाय है कोई तोड़ फोड़ नहीं है लेकिन फिर भी आपके घर की सारी नकारात्मकता को खत्म करके सकारात्मकता पैदा करती है।
जय माता दी..................

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें