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मंगलवार, 11 नवंबर 2014

नवग्रह - प्रकृति ही शक्ति है|

                                            

                     जय माता दी .............                                               
 प्रकृति ही शक्ति है प्रकृति ही प्रगति है प्रकृति के बिना कोई भी उन्नति नहीं कर सकता और प्रकृति के आभाव में सुब सुना हो जाता है |                                                                                
प्रकृति को सनातन धर्म शास्त्रों में माता का रूप बताया है और जैन शास्त्रों में भी प्रकृति को विशालकाय और कर्म बन्धनों का कारण बताया है प्रकृति नवग्रहों का आधार है प्रकृति नवग्रहों के अनिष्टो को कम करके नवग्रहों को मजबूत करते है , प्रकृति बीमारियों को दूर करके समस्त जीवो को स्वस्थ्य प्रधान करती है प्रकृति दुखो को दूर करने का सबसे सरल और सटीक उपाय है , प्रकृति घर के वास्तु दोषो के अनिष्ट को दूर खुशिया देते है|
प्रकृति की मदद से ही भारत वर्ष के ऋषि मुनियों और प्राचीन भारत नवग्रह के दोषों से और वास्तु के  दोषों से
दूर रह कर बहुत सारे शोध किये और दुनिया में अपना नाम छोड़ गए |                                        
प्रकृति जीवन दायिनी है प्रकृति ही शुर्य की उर्जा को प्राण वायु में बदल कर समस्त जीवो को जीवन प्रधान करती है प्रकृति के बिना इस संसार में जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है |                                  
प्रकृति के बिना इन्सान, परिवार, समाज , गाँव, शहर, देश और दुनिया कोई भी प्रगति नहीं कर सकता है और पिछड़ा पन  के शिकार हो जाते है प्रकृति के आभाव में बड़े बड़े शहेरो को दुःख और बीमारियों से घेर लिए है और इन्सान को मनोविक्रति दी है जिसकी वजह से बड़े बड़े शहेरो में आये दिन जुर्म हो रहे है |                                  अगर समाज, देश, दुनिया को बचाना है तो प्रकृति को बचाना जरुरी है नहीं तो सब कुछ विनाश के रास्ते चले जायेंगे और जो अब देखने को भी मिल रहा है कंही आकाल, कंही बाड , कंही तूफान , कंही समुंदरी तूफान आये दिन आते रहते है यंहा तक समुंद्र भी अब अपनी सीमा लांघने लगे है |                                    
सिर्फ प्रकृति ही आपके कुंडली के दोषों को , हस्त रेखा के दोषों को , नवग्रह के दोषों को और वास्तु दोषों को दूर करने की अद्भुत क्षमता है यंहा तक तंत्र मंत्र के दोषों को, भुत प्रेत बाधा और पितृ दोष से जो परेशानिया चल रही है उसे भी बहुत जल्दी हर लेती है और इन्सान को सुखी जीवन देने में मददगार है|
इसलिए में कहता हूँ की प्रकृति ही शक्ति है प्रकृति है प्रगति है प्रकृति ही दुःख हरणी है प्रकृति ही सुख करनी है और प्रकृति है सुब सुखो की जड़ है जिसमे अनेको खुशियों के फल लगते रहते है |                                              प्रक्रति से जुड़े और प्रकृति को बचाए और माता का आशीर्वाद पाए                      
                  जय माता दी .....................                
                 www.navgraha.net

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